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Tuesday, July 14, 2015

संसार में समय

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परम पूज्य सुधांशुजी महारा
ज
संसार में समय को बहुमूल्य संपदा माना गया है। समय की रफ़्तार इतनी तीव्र है कि पलक झपकते ही आप पिछड़ सकते है। इसलिए अपने जीवन के हर पल को, क्षण को कीमती मानकर उसका सदुपयोग करो। समय को कभी बरबाद मत करना। क्योंकि समय को जो व्यर्थ बिता देते है, समय उनको बरबाद कर देता है।"

Monday, July 13, 2015

"जन्म देने वाले



"जन्म देने वाले मालिक ने जीभ तो बनाई एक, पर कान बनाए दो। दो कान इसलिए बनाए कि ज्यादा सुन लेना, लेकिन ज्यादा बोलना नहीं । जितना बोलना नाप-तोल कर ही बोलना।

जीभ के आगे भगवान ने दरवाज़ा लगाया है, इसे बन्द करने के लिए। जिन्दगी में इंसान जितना भी बुरा करता है, ज्यादातर तो बुरा इस जीभ से ही करता है। इस जीभ का प्रयोग हथियार के रुप में कभी मत करना।"

यदि किसी को

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परम पूज्य सुधांशुजी महारा
ज

"यदि किसी को कुछ दे दिया जाए तो उसे सदा गुप्त ही रहने दो। घर में जब कभी कोई आ जाए तो उसका विधिपूर्वक सत्कार करो। यदि किसी का प्रिय कार्य कर दिया है तो उसके सम्बन्ध में मौन रहो और यदि किसी ने तुम्हारा उपकार किया है तो उसे सबके सामने प्रकट करते रहो।"

Sunday, July 12, 2015

चिंता से


चिंता से चिंतन को और यात्रा करो, मन शांत होगा.

Saturday, July 11, 2015

प्रत्येक इन्द्रिय का अपना


"मनुष्य की प्रत्येक इन्द्रिय का अपना धर्म है । उसे अपने धर्म का पालन करना चाहिये ।

आँख का धर्म है समस्त प्राणियों में ईश्वर का दर्शऩ करें । कान का धर्म है महापुरुषों की अमृतवाणी सुनना, दूसरों की अच्छाइयाँ सुनना। मुख का धर्म है सत्य और प्रिय वचन बोलना । हाथों का धर्म है सत्कर्म करना, सेवा धर्म अपनाना। प्रत्येक मनुष्य का धर्म है कि अपने प्रति, परिवार के प्रति, समाज के प्रति, राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों को पूरा करें।"


भविष्य की नींव

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परम पूज्य सुधांशुजी महारा
ज

"भविष्य  जानने की कोशिश मत करो। भविष्य परमात्मा के हाथ में है, वर्तमान आप के हाथ में है। भूतकाल बीत गया, उस की कोई कीमत नहीं । वर्तमान को अच्छा बना रहे है तो भविष्य की नींव डाल रहे हैं ।"

Friday, July 10, 2015

भविष्य जानने

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परम पूज्य सुधांशुजी महारा
ज


"भविष्य  जानने की कोशिश मत करो। भविष्य परमात्मा के हाथ में है, वर्तमान आप के हाथ में है। भूतकाल बीत गया, उस की कोई कीमत नहीं । वर्तमान को अच्छा बना रहे है तो भविष्य की नींव डाल रहे हैं ।"

अन्याय , अभाव



अन्याय , अभाव और आलस्य अज्ञानता के कारण ही पैदा होते है। ज्ञान हो तो यह सारी चीजें मिटने लगती है। सबसे पहले अज्ञान का नाश करने की बात सोचिए। अज्ञान का नाश ऐसे नहीं होगा कि आपने पुस्तकें पढ़ लीं और सत्संग सुन लिया। यह तो माध्यम मात्र हैं । पढ़ने, सुनने के बाद मनन ज्ररुर करें कि मैं इन विचारों को जीवन में कैसे अपना सकता हूं और इनसे कैसे प्रेरणा ले सकता हूं ।

devi mantra



Ya devi sarva bhutesu, shanti rupena sansitha 
Ya devi sarva bhutesu, shakti rupena sansthita
Ya devi sarva bhutesu, matra rupena sansthita 
Namastasyai, namastasyai, namastasyai, namo namaha!

Sarva mangala maangalye shive sarvaartha saadhike
Sharanye trayambake Gauri
Narayani namosthute

Namoh devyai mahadevyai shivayai satatam namah
Namah prakrutyai bhadraayai niyataah pranataahsma taam

Annapoorne sadapoorne shankarah praanavallabhe
Njana vairaagya sidhyardham bhikshaam dehi cha parvati

Thursday, July 9, 2015

हम हमेशा डरते




हम हमेशा डरते रहते  हें कि हम मिट न जाए , हम खो न जाए ,हमारा कुछ छिन  न जाए , कोई हमारा हुछ ले न ले ,हर समय डर में सहमे हुए हें ,चिंताओं में जी रहे हें ! याद रखो निराशा ,डर हमें खोखला कर देता हें इन से बचो !