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Tuesday, July 28, 2015

जो भाग्य

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परम पूज्य सुधांशुजी महारा


"जो भाग्य में है , वह
               भाग कर आएगा,
जो नहीं है , वह 
          आकर भी भाग जाएगा...!"


मगर भाग्य पर मत बैठे रहो कर्म करते जाओ 
कर्मशील बनो भाग्यवादी नहीँ 

Monday, July 27, 2015

जीवन


  • जीवन जीते जीते जीवन के सांझ सामने आजाती हे मगर जीना नहीँ आया !

Sunday, July 26, 2015

जीवन में



जीवन में किसी का भला करोगे,तो लाभ होगा...
क्योंकि भला का उल्टा लाभ होता है ।

Saturday, July 25, 2015

कुए में

कुए में उतरने वाली बाल्टी यदि झुकती है,तो भरकर बाहर आती ,जीवन का भी यही गणित है,जो झुकता है वह प्राप्त करता है.

गुरुवर आना पडेगा

गुरुवर आना पडेगा


गुरुवर आना पडेगा गुरुवार तुम को आना पडेगा ,


प्यार से पुकारा तुम को आना ही पडेगा !


आकर देना गुरुवर मुझ को इतनी शक्ती ,


बिसरे न कभी तुम्हारी भक्ती !


लगा बैठा हूँ में तेरे चरणों की आस ,


आकर गुरुवर मिटा दो दिल की प्यास !


में तुम्हारी भक्ती में इतना डूब जाऊं ,


की अपना होश भी खो जाऊं !


तेरे पैरों की आहट से ,


लग जाए मुझे पता की गुरुवर आए हैं यहाँ !


तेरी सुगंध से ही महके वातावरण ,


और सूघं कर पता लग जाए आप के आने की ख़बर !


में जिधर भी देखूं तेरी सूरत ही दिखाई दे ,


हमेशा मेरे आस पास तुही दिखाई दे !


तेरी महिमा हे निराली ,


गुरुवर मुझ पर भी करदो महरबानी,


तुझ से इतना प्यार पाऊं ,कहे मदन गोपाल कि ,


दुनिया ही भूल जाऊँ !

Thursday, July 23, 2015

सात क़ा रहस्य



सात क़ा रहस्य
आपका शरीर सात चक्रों में बंधा हुआ हें ! सात दिनों में ही जिंदगी पूरी होती हें ,सात सुरों में सारा संगीत बंधा हुआ हें ! रंग भी सात हें ,समुन्द्र सात हें ,सप्त आहुतियाँ हें ,सप्त द्वीप हें , सप्त ऋषि हें ,इसलिए सात क़ा बड़ा महत्त्व हें , इन सात दिनों में अपने जीवन को व्यवस्थित कर लें ,तो आपका कल्याण जो जायेगा !
गुरुवर सुधांशुजी महाराज के प्रवचनांश 

Wednesday, July 22, 2015

आपके द्वारा




आपके द्वारा जितने लोग दुनिया में अच्छाई पर चलतेजायेंगे, उनके पुण्यों का कुच्छ-न-कुच्छ भाग आपके खाते में जुडता चला जायेगा।

Tuesday, July 21, 2015

Fwd: [Suvichar - Good Thoughts by Param Pujya Sudhanshuji Maharaj] अपनी समृद्धि के


 अपनी समृद्धि के



अपनी समृद्धि के विस्तार में कभी किसी प्रकार का प्रमाद न करें। ज्ञान का विस्तार करने में, विद्या अध्ययन करने में कभी आलस्य नहीं करना, जो आपने अपने जीवन में सीखा, पुस्तकों से सीखा, गुरुओं से सीखा, उसको निरन्तर दोहराओ जिससे ज्ञान आपके काम आ सके। पढ़ना, समझना और फिर जीवन में उतारना यही ज्ञान का उपयोग है।


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Posted By Madan Gopal Garga to Suvichar - Good Thoughts by Param Pujya Sudhanshuji Maharaj at 7/21/2015 10:44:00 AM

अपनी समृद्धि के

अपनी समृद्धि के विस्तार में कभी किसी प्रकार का प्रमाद न करें। ज्ञान का विस्तार करने में, विद्या अध्ययन करने में कभी आलस्य नहीं करना, जो आपने अपने जीवन में सीखा, पुस्तकों से सीखा, गुरुओं से सीखा, उसको निरन्तर दोहराओ जिससे ज्ञान आपके काम आ सके। पढ़ना, समझना और फिर जीवन में उतारना यही ज्ञान का उपयोग है।

Sunday, July 19, 2015

इंसान पदार्थो का





इंसान पदार्थो का बहुत महत्व मानने लग जाता है। ज्ञान की बडी-बडी बातें भी करता है, लेकिन प्राप्ति तब होती है जिस दिन यह अहसास हो जाता है कि पदार्थ दिए हैं मालिक ने खेल करने के लिए, मालिक ले भी सकता है। लेकिन मुझे पदार्थ के पीछे नहीं भागना है, मालिक को ही पकड़ लेना है।