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Monday, May 26, 2008

Shree Sudhanshuji Maharaj

Anand Dham Ashram, spiritual and social centre established at Delhi.

The ashram provides all the facilities for a quiet retreat, spiritual and health rejuvenation and Vedic learning. It has temples and prayer halls for the devotees and for the public.

Shree Sudhanshuji Maharaj


Vishwa Jagriti Mission

Param Pujya Sudhanshu Maharaj on AOL Television

Param Pujya Sudhanshu Maharaj on AOL Television

Yoga Guru Swami Ramdev

Recently under attack from Left leader Brinda Karat who alleged that ayurvedic medicines made at Swami Ramdev's pharmacy contained animal parts and bones, the yoga Guru found a supporter in another religious preacher Acharya Sudhanshu Maharaj, who came out strongly in his defence.

Vishwa Jagriti Mission

Sunday, April 27, 2008

गुरु नाम की महिमा

गुरु का नाम जपता जा
-तेरे पाप कटेंगे !
गुरु का मंत्र जपता जा
-तेरे पाप कटेंगे !
गुरु से स्नेह बढाते जा
-तेरे पाप कटेंगे !
गुरु को ह्रदय में बैठा
-तेरे पाप कटेंगे !
गुरु चरणों में ध्यान लगा
-तेरे पाप कटेंगे !
गुरु वाणी में रम जा
-तेरे पाप कटेंगे !
गुरु को मन में बसा
-तेरे पाप कटेंगे !
गुरु सेवा में देह लगा
-तेरे पाप कटेंगे !
गुरु कार्य में धन लगा
-तेरे पाप कटेंगे !
गुरु धाम के दर्शन कर
-tere paap कटेंगे !
कहे "मदन गोपाल " तू गुरु का
कहना मान मेरे भाई
-तेरे पाप कटेंगे
मदन गोपाल गर्ग (कल्याण )
स्मारिका २००८ श्रदधा विश्व जागृति मिशन ठाणे मंडल से लिया

Sunday, November 4, 2007

पुस्तके : आलोक पथ

पुस्तके : आलोक पथ


ज्ञान का दीपक जल गया तो कष्ट-क्लेश अपने आप दूर हो जायेगा, अँधेरा भाग जायेगा। अँधेरे सं लढाई मत मोल लो, केवल दीपक जलाओ।


जो झानी है वह अन्दर-बहार से सरल होगा। दोनों ओर से सरलता टपकेगी, कही भी कपट नही, कुटिलता नही। सीधी-सीधी भाषा और बच्चो जैसा निश्छल मन।


प्रकृति मे तीन गुण है - सत, रज और तम। जिस गुण की मात्रा शरीर और मन-मस्तिष्क में बढती है उसी के अनुसार व्यक्ति का व्यवहार दिखाई देने लगता है।


आपके स्वभाव में कुछ इस तरह कि ताजगी होनी चाहिये जैसे किसी पहाड़ी स्थान पर सुबह-सुबह खिले हुये फूलों पर पडी हुई ओस।


आपकी वाणी सत्य से प्रतिष्टित हो, प्रिय हो और हितकर हो। अपनी वाणी को ज्ञान के मधुर शब्दो से सजाओ।



मृत्यु इस जन्म कि आख़िरी नींद है। जन्म अगले जीवन का पहला जागरण है। पड़ाव पर थक कर सो जाना-बस, इसी का नाम मौत है। जागा तो नयी ताजगी से भर कर आगे चल दिया।

- परम पूज्य सुधांशुजी महाराज

Wednesday, October 31, 2007

हे ब्रह्मज्ञान के प्रकाशपुंज


पुस्तक : संचेतना जुलाई २००७

हे सदगुरूदेवा हे ब्रह्मज्ञान के प्रकाशपुंज। हे सृजनात्मक शक्ति के स्वामी। हम सभी भक्तों का श्रद्धा भरा प्रणाम स्वीकार हो।
हे त्रिगुणातीत आप दयालु हो, परम कृपालु को, धर्म के संवाहक हो, ऋषि -मुनियों की परंपरा के सजीव उदाहरण हो, काल -कालांतर के वृताँतों और अनुभवों की सुखद अनुभूति हो, आपने हमें परिश्रम, पुरूषार्थ , साहस, सहनशक्ति, तन्मयता, स्वावलंबन, नियमितता, व्यवस्था, स्वच्छता, सेवा और सहयोग रूपी अनुपम सीख देकर जो हमारे ऊपर उपकार किया है, इसके लिए हम आपके आभारी हैं।

हे मानवता के पथ प्रदर्शक। आपकी ज्ञानमयी अमृत वाणी सदैव हमारे अंग संग रहती है। भगवान की स्तुति, प्रार्थना, उपासना में आपका सदज्ञान एवं निर्देशन ही सहायक सिद्ध होता है। भाव में अभाव में, उन्नति-अवनति में और जीवन की सुनसान राहों में आप सखा बनकर हमेशा हमारे साथ रहते हो।

आपके आशीष का अमृत सदैव हमें प्राप्त होता रहे, यही हमारी अभिलाषा है।
हे ज्ञान के सागर। आपके ब्रह्मज्ञान की अनुगूँज से अंतर्मन में शान्ति कि उत्पति होती है। तब हारे अन्त:करण में आनन्द की तरंगें हिलोरें लेने लगती हैं और हमारा रोम-रोम आनन्द से पुलकित हो जाता है जिससे हमारा व्यवहार रसपूर्ण तथा प्रेमपूर्ण हो जाता है। हे गुरूवर। हमारा ह्रदय सदैव आपसे जुडा रहे, हम पर आपकी कृपा बरसती रहे और हमारा मै आपके श्रीचरणों में लगा रहे। यही प्रार्थना है, याचना है, स्वीकार कीजिए। हम सबका बेडा पार कीजिए।

गुरू चरणों में
समस्त शिष्यों के ह्रदयों की आर्त्त पुकार

Tuesday, October 16, 2007

संत कबीर दोहे

सब धरती कागद करूं, लखनी सब बनराय।

सात समुँदर की मसि करूं, गुरू गुन लिखा न जाय।।

कबीर ते नर अंध है, गुरू को कहते और।

हरी रूठे गुरू ठौर है, गुरू रूठे नहीं ठौर।।

गुरू बडे गोविन्द ते, मन में देखू विचारी।

हरी सुमिरे सो बार, गुरू सुमिरे सो पार।।

Monday, October 15, 2007

श्री श्रीगुरू बंदना


अखंड मंडलाकार व्याप्त येन चराचर

तदंपदं दर्शितम येन तस्मै श्री गुरूवे नम:

अज्ञान तिमिरान्धश्य ,ग्यानांजन शलाकया

च्क्षूरून्मीलितनं येन तस्मै श्री गुरवे नम;

Saturday, October 13, 2007

गुरू महिमा


गुरू गोविन्द दोउ ,खडे काके लागुं पाय।

बलिहारी गुरूदेव की ,जिन गोविंस दियो बताय।।


गुरू बिन ज्ञान न उपजे ,गुरू बिन भक्ति न होय।

गुरू बिन संशय ना मिटे ,गुरू बिन मुक्ति न होय।।


गुरू -धोबी शिष्-कापडा ,साबुन -तिरजनहार।

तुरत -सिला पर धोइये ,निकले रंग अपार।।

Monday, October 8, 2007

पथ प्रदर्शक

पथ प्रदर्शक, जब हो गुरुवर हमारे
बढ़े कदम, बस वहीं हमारे ! !




अखंड्मडंलाकारम
व्याप्तं येन चराचरम

तत्पदम दशिर्तम येन तस्मै श्री गुरवे नम: